नन्दकुमाराष्टकम् — Complete Lyrics
नन्दकुमाराष्टकम्
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
सुन्दरगोपालमुरवनमालं नयनविशालं दुःखहरम् ।
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं नन्दसुतम् ॥
इति श्रीनन्दकुमारमष्टकं पठति यः शृणुयाद्विश्वासम् ।
वृन्दावनचन्द्रः कृपयति तस्मै नन्दसुताय नमो नमः ॥
Sundara-gopālam ura-vana-mālaṃ nayana-viśālaṃ duḥkha-haram |
Vṛndāvana-candram ānanda-kandaṃ paramānandaṃ nanda-sutam ||
Iti śrī-nanda-kumāram aṣṭakaṃ paṭhati yaḥ śṛṇuyād viśvāsam |
Vṛndāvana-candraḥ kṛpayati tasmai nanda-sutāya namo namaḥ ||
मैं उस सुन्दर गोपाल का भजन करता हूँ, जिनके वक्षस्थल पर वनमाला सुशोभित है, जिनके नेत्र कमल के समान विशाल हैं, जो समस्त दुःखों के हर्ता हैं; जो वृन्दावन के चन्द्रमा हैं, आनन्द के मूल हैं, परमानन्दस्वरूप हैं, नन्द के पुत्र हैं। जो भी इस नन्दकुमार अष्टक का पाठ करता है अथवा श्रद्धापूर्वक सुनता है, उस पर वृन्दावनचन्द्र नन्दसुत कृपा करते हैं। उन्हें बार-बार नमस्कार है।
Verse 2
कालियनागविमर्दनकारी गोपीचित्तविहारी ।
मुरलीधरमुखचन्द्रमनोहारी विश्वविहारी गिरिधारी ॥
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं नन्दसुतम् ।
भजरे भजरे मनुजमनुष्यं नन्दसुताय नमो नमः ॥
Kāliya-nāga-vimardana-kārī gopī-citta-vihārī |
Muralī-dhara-mukha-candra-manohārī viśva-vihārī giridhārī ||
Vṛndāvana-candram ānanda-kandaṃ paramānandaṃ nanda-sutam |
Bhajare bhajare manuja-manuṣyaṃ nanda-sutāya namo namaḥ ||
जिन्होंने कालिय नाग का दमन किया, जो गोपियों के चित्त में विहार करते हैं; जो मुरलीधर हैं और जिनका चन्द्रमुख सबको मोहित करता है, जो विश्व में विचरते हैं, जो गिरिधारी हैं — वे वृन्दावनचन्द्र, आनन्दकन्द, परमानन्द, नन्दसुत हैं। हे मनुष्यो! उनका भजन करो, भजन करो! नन्दसुत को बार-बार नमस्कार है।
Verse 3
इन्द्रादिकगर्वविनाशनकारी गोवर्धनधारी ।
धेनुकमुख्यासुरमर्दनकारी कंसनिकन्दनकारी ॥
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं नन्दसुतम् ।
भजरे भजरे मनुजमनुष्यं नन्दसुताय नमो नमः ॥
Indrādika-garva-vināśana-kārī govardhana-dhārī |
Dhenuka-mukhyāsura-mardana-kārī kaṃsa-nikandana-kārī ||
Vṛndāvana-candram ānanda-kandaṃ paramānandaṃ nanda-sutam |
Bhajare bhajare manuja-manuṣyaṃ nanda-sutāya namo namaḥ ||
जिन्होंने इन्द्र आदि देवों के गर्व का नाश किया, गोवर्धन पर्वत को धारण किया, धेनुक आदि असुरों का मर्दन किया और कंस का संहार किया — वे वृन्दावनचन्द्र, आनन्दकन्द, परमानन्द, नन्दसुत हैं। हे मनुष्यो! उनका भजन करो, भजन करो! नन्दसुत को बार-बार नमस्कार है।
Verse 4
श्रीदामसुदामसुबलसखेन सह विहरन्तं विपिनेन ।
गोपगणैः सह गोधनचारी वंशीवटतटविहारी ॥
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं नन्दसुतम् ।
भजरे भजरे मनुजमनुष्यं नन्दसुताय नमो नमः ॥
Śrīdāma-sudāma-subala-sakhena saha viharantaṃ vipinena |
Gopa-gaṇaiḥ saha go-dhana-cārī vaṃśī-vaṭa-taṭa-vihārī ||
Vṛndāvana-candram ānanda-kandaṃ paramānandaṃ nanda-sutam |
Bhajare bhajare manuja-manuṣyaṃ nanda-sutāya namo namaḥ ||
जो श्रीदामा, सुदामा और सुबल आदि सखाओं के साथ वन में विहार करते हैं, ग्वालबालों के संग गोधन चराते हैं, वंशीवट के तट पर विहार करते हैं — वे वृन्दावनचन्द्र, आनन्दकन्द, परमानन्द, नन्दसुत हैं। हे मनुष्यो! उनका भजन करो, भजन करो! नन्दसुत को बार-बार नमस्कार है।
Verse 5
यशोमतिनन्दननन्दकिशोरं नवनीतचोरमतिधीरम् ।
नयनसरोरुहभृङ्गमनोहरं वदनसुधाकरसुन्दरम् ॥
वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं नन्दसुतम् ।
भजरे भजरे मनुजमनुष्यं नन्दसुताय नमो नमः ॥
Yaśomati-nandana-nanda-kiśoraṃ navanīta-coram ati-dhīram |
Nayana-saroruha-bhṛṅga-manoharaṃ vadana-sudhākara-sundaram ||
Vṛndāvana-candram ānanda-kandaṃ paramānandaṃ nanda-sutam |
Bhajare bhajare manuja-manuṣyaṃ nanda-sutāya namo namaḥ ||
जो माता यशोदा के लाडले नन्दकिशोर हैं, नवनीत चुराने वाले परम धीर हैं, जिनके कमलनयन भ्रमर के समान मनोहर हैं, जिनका मुख अमृतमय चन्द्रमा के समान सुन्दर है — वे वृन्दावनचन्द्र, आनन्दकन्द, परमानन्द, नन्दसुत हैं। हे मनुष्यो! उनका भजन करो, भजन करो! नन्दसुत को बार-बार नमस्कार है।
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