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नारायणी स्तुति PDF

नारायणी स्तुति की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

devi prapannārti-hare prasīda prasīda mātar-jagato'khilasya | prasīda viśveśvari pāhi viśvaṃ tvam-īśvarī devi carācarasya ||

हे देवि, शरणागतों के दुःख हरने वाली, प्रसन्न होइए; हे समस्त जगत् की माता, प्रसन्न होइए। हे विश्वेश्वरि, प्रसन्न होकर विश्व की रक्षा कीजिए — आप ही चराचर जगत् की ईश्वरी हैं।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

sarva-maṅgala-māṅgalye śive sarvārtha-sādhike | śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te ||

हे सर्व-मङ्गलों की मङ्गलमयी, हे कल्याणी, हे समस्त अर्थों को सिद्ध करने वाली, हे शरण्ये, हे त्र्यम्बके गौरि — हे नारायणि, आपको नमस्कार हो।

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

sṛṣṭi-sthiti-vināśānāṃ śakti-bhūte sanātani | guṇāśraye guṇa-maye nārāyaṇi namo'stu te ||

हे सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्तिस्वरूपा, हे सनातनि, हे गुणों की आश्रया और गुणमयी — हे नारायणि, आपको नमस्कार हो।

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

śaraṇāgata-dīnārta-paritrāṇa-parāyaṇe | sarvasyārti-hare devi nārāyaṇi namo'stu te ||

हे शरण में आए दीन और आर्त जनों के उद्धार में सदा तत्पर, हे सबकी पीड़ा हरने वाली देवि — हे नारायणि, आपको नमस्कार हो।

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

sarva-svarūpe sarveśe sarva-śakti-samanvite | bhayebhyas-trāhi no devi durge devi namo'stu te ||

हे सर्वस्वरूपा, हे सर्वेश्वरी, हे समस्त शक्तियों से युक्त! हे दुर्गे देवि, हमें सब भयों से बचाइए; हे देवि, आपको नमस्कार हो।

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

rogān-aśeṣān-apahaṃsi tuṣṭā ruṣṭā tu kāmān sakalān-abhīṣṭān | tvām-āśritānāṃ na vipan-narāṇāṃ tvām-āśritā hy-āśrayatāṃ prayānti ||

प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश कर देती हैं, और रुष्ट होने पर सभी अभीष्ट कामनाओं को विफल कर देती हैं। जो आपकी शरण में हैं उन पर कोई विपत्ति नहीं आती, बल्कि आपके आश्रित स्वयं दूसरों के आश्रय बन जाते हैं।