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श्री नर्मदा जी की आरती PDF

श्री नर्मदा जी की आरती की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी । ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिवहर शंकर । रुद्री पालन्ती, मैया रुद्री पालन्ती ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Om Jai Jagadaanandi, Maiya Jai Aananda Kandi Brahma Harihara Shankara, Rewa Shivahara Shankara Rudri paalanti, Maiya Rudri paalanti Om Jai Jagadaanandi

हे समस्त जगत को आनन्द देने वाली, आनन्द की मूल माता, तुम्हारी जय हो! ब्रह्मा, विष्णु और शिव तुम्हारी वन्दना करते हैं, हे रेवा; रुद्र-शक्ति रूप में तुम सबका पालन करती हो।

देवी नारद-शारद, तुमरो जश गावैं । सुर-नर-मुनि-जन धावैं, अमरी सुख पावैं ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Devi Naarada-Shaarada, tumaro jasha gaavain Sura-nara-muni-jana dhaavain, amari sukha paavain Om Jai Jagadaanandi

नारद और शारदा तुम्हारा यश गाते हैं; देव, मनुष्य और मुनिजन तुम्हारी ओर दौड़ते हैं और अमर सुख पाते हैं।

धवल कमल-दल लोचन, बाहु विशाला । प्रेम सहित भुजबल से, धरती प्रतिपाला ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Dhavala kamala-dala lochana, baahu vishaala Prema sahita bhujabala se, dharti pratipaala Om Jai Jagadaanandi

तुम्हारे नेत्र श्वेत कमल-दल समान हैं और भुजाएँ विशाल हैं; प्रेमपूर्वक अपने भुजबल से तुम धरती का पालन करती हो।

देवी कोटि नर तारे, नर्मदा भगवती । भक्तन को सुख देती, पावन तेरी रज भी ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Devi koti nara taare, Narmada Bhagavati Bhaktana ko sukha deti, paavana teri raja bhi Om Jai Jagadaanandi

हे भगवती नर्मदा, तुम करोड़ों मनुष्यों को तार देती हो; भक्तों को सुख देती हो और तुम्हारी रज (कंकर) भी पावन है।

यन्त्र-मन्त्र सब हारे, शरण तिहारी आये । कोटि रतन है सम्मुख, फिर भी कर न पसारे ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Yantra-mantra saba haare, sharana tihaari aaye Koti ratana hai sammukha, phira bhi kara na pasaare Om Jai Jagadaanandi

जब यन्त्र-मन्त्र सब हार जाते हैं, तब हम तुम्हारी शरण में आते हैं; करोड़ों रत्न सम्मुख होने पर भी तुम अपने लिए हाथ नहीं पसारतीं।

मातु शुभे सुखदाई, सेवक-जन सुखदा । जो जन शरण में आये, उनको देती मुक्ता ॥ ॐ जय जगदानन्दी ॥

Maatu shubhe sukhadaai, sevaka-jana sukhada Jo jana sharana mein aaye, unako deti mukta Om Jai Jagadaanandi

हे शुभदायिनी, सुखदायिनी माता — जो भी तुम्हारी शरण में आता है, उसे तुम मुक्ति प्रदान करती हो।

नर्मदा जी की आरती, जो जन नित गावै । हर-हर के पद पावे, भव से तर जावै ॥ ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी ॥

Narmada ji ki aarti, jo jana nita gaavai Hara-Hara ke pada paave, bhava se tara jaavai Om Jai Jagadaanandi, Maiya Jai Aananda Kandi

जो जन नित्य नर्मदा जी की यह आरती गाता है, वह शिव (हर) के चरण पाकर भवसागर से तर जाता है।