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नास्था धर्मे न वसुनिचये PDF

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नास्था धर्मे न वसुनिचये नैव कामोपभोगे यद्यद्भव्यं भवतु भगवन् पूर्वकर्मानुरूपम्। एतत्प्रार्थ्यं मम बहुमतं जन्मजन्मान्तरेऽपि त्वत्पादाम्भोरुहयुगगता निश्चला भक्तिरस्तु॥

nāsthā dharme na vasu-nicaye naiva kāmopabhoge yad yad bhavyaṃ bhavatu bhagavan pūrva-karmānurūpam | etat prārthyaṃ mama bahu-mataṃ janma-janmāntare 'pi tvat-pādāmbhoruha-yuga-gatā niścalā bhaktir astu ||

न धर्म में, न धन-संचय में, न काम-भोग में मेरी आस्था है। हे भगवन्! पूर्वकर्म के अनुरूप जो होना हो, वह हो। जन्म-जन्मान्तर में भी मेरी यही प्रिय प्रार्थना है — आपके चरण-कमल-युगल में मेरी अचल भक्ति बनी रहे।