नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो PDF
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥
nāyam ātmā pravacanena labhyo na medhayā na bahunā śrutena yam evaiṣa vṛṇute tena labhyas tasyaiṣa ātmā vivṛṇute tanūṁ svām
यह आत्मा न प्रवचन से प्राप्त होती है, न बुद्धि से, और न बहुत शास्त्र-श्रवण से। जिसे यह स्वयं वरण कर लेती है, उसी के द्वारा यह प्राप्त होती है; उसी के लिए यह आत्मा अपना यथार्थ स्वरूप प्रकट कर देती है।