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निगमकल्पतरोर्गलितं फलम् PDF

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निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम्। पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः॥

Nigama-kalpa-taror galitaṃ phalaṃ śuka-mukhād amṛta-drava-saṃyutam. pibata bhāgavataṃ rasam ālayaṃ muhur aho rasikā bhuvi bhāvukāḥ.

हे इस पृथ्वी के रसिक एवं भावुक भक्तजनो! श्रीमद्भागवत रूपी रस का बारम्बार, मोक्ष-पर्यन्त पान करो — यह वेद रूपी कल्पवृक्ष का पूर्ण पका हुआ गिरा हुआ फल है, जो श्रीशुकदेव गोस्वामी के मुख से होकर और भी अमृतमय हो गया है।