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फुल्लेन्दीवरकान्तिम् (कृष्ण ध्यान) PDF

फुल्लेन्दीवरकान्तिम् (कृष्ण ध्यान) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

फुल्लेन्दीवरकान्तिमिन्दुवदनं बर्हावतंसप्रियं श्रीवत्साङ्कमुदारकौस्तुभधरं पीताम्बरं सुन्दरम्। गोपीनां नयनोत्पलार्चिततनुं गोगोपसङ्घावृतं गोविन्दं कलवेणुवादनपरं दिव्याङ्गभूषं भजे॥

Phullendivara-kantim indu-vadanam barhavatamsa-priyam, Shrivatsankam udara-kaustubha-dharam pitambaram sundaram, Gopinam nayanotpalarchita-tanum go-gopa-sanghavritam, Govindam kala-venu-vadana-param divyanga-bhusham bhaje.

मैं उन गोविन्द का भजन करता हूँ, जिनकी कान्ति पूर्ण-विकसित नीलकमल जैसी है, जिनका मुख चन्द्रमा-सा है, जिन्हें मोरपंख का अवतंस प्रिय है; जो श्रीवत्स-चिह्न और उदार कौस्तुभमणि धारण किए हैं, पीताम्बर में सुन्दर हैं; जिनका शरीर गोपियों के कमल-नयनों से अर्चित है, जो गौओं और गोपों के समूह से घिरे हैं, मधुर वेणुवादन में लीन हैं, और जिनके दिव्य अंग आभूषणों से सुशोभित हैं।