श्री राधा रानी की आरती PDF
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आरती श्री वृषभानु-सुता की । कीरति-नन्दिनि राधिका जू की ॥ श्री राधिका जू की, श्री वृषभानु-सुता की ॥
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki Keerati-nandini Raadhika ju ki Shri Raadhika ju ki, shri Vrishabhanu-suta ki
यह श्री वृषभानु-नन्दिनी राधा की आरती है, माता कीर्ति की दुलारी राधिका जी की वंदना।
शुभ जन्मी वृषभानु-दुलारी । नित्य किशोरी श्याम-प्यारी ॥ वृन्दावन की रासेश्वरी जू की । आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Shubha janmi Vrishabhanu-dulaari Nitya Kishori Shyaama-pyaari Vrindavana ki Raaseshvari ju ki Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
वृषभानु जी की दुलारी रूप में शुभ जन्म लेने वाली, नित्य किशोरी और श्याम की प्यारी, वृन्दावन की रासेश्वरी राधिका जी की।
गौर-वरण तन सुन्दर सोहे । नयन कमल त्रिभुवन-मन मोहे ॥ मुख की शोभा चन्द्र-विभा की । आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Gaura-varana tana sundara sohe Nayana kamala tribhuvana-mana mohe Mukha ki shobha chandra-vibha ki Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
उनका गौरवर्ण तन अत्यन्त सुन्दर शोभित है; कमल समान नेत्र तीनों लोकों के मन को मोह लेते हैं, और मुख की शोभा चन्द्रमा की प्रभा-सी है।
नील-वसन तन पीत-दुपट्टा । कंचन-थाल बिराजत झट्टा ॥ मणि-मय भूषण देह सजा की । आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Neela-vasana tana peeta-dupatta Kanchana-thaala biraajata jhatta Mani-maya bhooshana deha saja ki Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
नील वस्त्र और पीत दुपट्टे से सुसज्जित, सम्मुख कंचन-थाल सुशोभित, मणिमय आभूषणों से देह अलंकृत।
श्याम-प्रिया तुम जग-हितकारी । रास-विलासिनि बनवारी-प्यारी ॥ ब्रज-जन-वल्लभ सुख-दात्री जू की । आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Shyaama-priya tuma jaga-hitakaari Raasa-vilaasini Banavaari-pyaari Braja-jana-vallabha sukha-daatri ju ki Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
हे श्याम-प्रिया, तुम जगत का कल्याण करने वाली हो; रास-विलासिनी, बनवारी की प्यारी, ब्रजवासियों की वल्लभा और सुख देने वाली राधिका जी।
जो नर राधा-आरती गावे । श्याम-श्यामा का दर्शन पावे ॥ प्रेम-भक्ति वर मिले सदा की । आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥ श्री राधिका जू की, श्री वृषभानु-सुता की ॥
Jo nara Raadha-aarti gaave Shyaama-Shyaama ka darshana paave Prema-bhakti vara mile sada ki Aarti shri Vrishabhanu-suta ki Shri Raadhika ju ki, shri Vrishabhanu-suta ki
जो जन राधा जी की यह आरती गाता है, उसे श्याम-श्यामा (कृष्ण-राधा) का युगल दर्शन प्राप्त होता है और सदा के लिए प्रेम-भक्ति का वरदान मिलता है।