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श्रीराम आपदुद्धारण स्तोत्रम् PDF

श्रीराम आपदुद्धारण स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् । लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ १॥

Apadam-Apahartaram Dataram Sarva-Sampadam | Lokabhiramam Shri-Ramam Bhuyo Bhuyo Namamy-Aham || 1||

जो समस्त आपदाओं को हरने वाले, समस्त सम्पदाओं को देने वाले, लोकों को आनन्द देने वाले श्रीराम हैं — उन्हें मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।

आर्तानामार्तिहन्तारं भीतानां भीतिनाशनम् । द्विषतां कालदण्डं तं रामचन्द्रं नमाम्यहम् ॥ २॥

Artanam-Arti-Hantaram Bhitanam Bhiti-Nashanam | Dvishatam Kala-Dandam Tam Ramachandram Namamy-Aham || 2||

जो आर्तजनों की पीड़ा को नष्ट करने वाले, भयभीतों के भय को मिटाने वाले, और शत्रुओं के लिए साक्षात् कालदण्ड हैं — उन रामचन्द्र को मैं प्रणाम करता हूँ।

नमः कोदण्डहस्ताय सन्धीकृतशराय च । खण्डिताखिलदैत्याय रामायापन्निवारिणे ॥ ३॥

Namah Kodanda-Hastaya Sandhi-Krita-Sharaya Cha | Khandita-Akhila-Daityaya Ramaya-Apan-Nivarine || 3||

कोदण्ड धनुष हाथ में धारण किए, बाण को संधान किए हुए, समस्त दैत्यों का खण्डन करने वाले, समस्त आपत्तियों के निवारक श्रीराम को नमस्कार है।

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे । रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ ४॥

Ramaya Ramabhadraya Ramachandraya Vedhase | Raghunathaya Nathaya Sitayah Pataye Namah || 4||

राम को, रामभद्र को, विधाता रामचन्द्र को, नाथ रघुनाथ को, सीता के पति को नमस्कार है।