रोगानशेषानपहंसि तुष्टा PDF
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रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥
rogānaśeṣānapahaṃsi tuṣṭā ruṣṭā tu kāmān sakalānabhīṣṭān tvāmāśritānāṃ na vipannarāṇāṃ tvāmāśritā hyāśrayatāṃ prayānti
प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं; पर रुष्ट होने पर (दुष्टों के) समस्त अभीष्ट कामनाओं का। जो आपकी शरण में आ गए, उन मनुष्यों पर कोई विपत्ति नहीं आती; बल्कि जो आपकी शरण में हैं, वे (औरों के लिए) आश्रय बन जाते हैं।
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
śaraṇāgatadīnārtaparitrāṇaparāyaṇe sarvasyārtihare devi nārāyaṇi namo'stu te
हे शरणागत, दीन और आर्त जनों की रक्षा में तत्पर! हे सबकी पीड़ा हरने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te
हे समस्त मंगलों की मांगल्य-स्वरूपा! हे कल्याणी शिवे! हे समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली! हे शरण्ये त्र्यम्बके गौरी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।