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सरसिजनिलये (महालक्ष्मी ध्यान श्लोक) PDF

सरसिजनिलये (महालक्ष्मी ध्यान श्लोक) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे। भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्॥

sarasija-nilaye saroja-haste dhavala-tamāṃśuka-gandha-mālya-śobhe | bhagavati hari-vallabhe manojñe tri-bhuvana-bhūti-kari prasīda mahyam ||

हे कमल में निवास करने वाली, हाथों में कमल धारण करने वाली देवी, जो अत्यन्त श्वेत वस्त्रों तथा सुगन्धित मालाओं से सुशोभित हैं; हे भगवति, हरि (विष्णु) की प्रिया, मनोहारी, तीनों लोकों को ऐश्वर्य प्रदान करने वाली — मुझ पर प्रसन्न होइए।