सर्वं खल्विदं ब्रह्म — Complete Lyrics
सर्वं खल्विदं ब्रह्म
Sanskrit text with English transliteration and translation
सर्वं खल्विदं ब्रह्म तज्जलानिति शान्त उपासीत ।
अथ खलु क्रतुमयः पुरुषो यथाक्रतुरस्मिँल्लोके पुरुषो भवति तथेतः प्रेत्य भवति स क्रतुं कुर्वीत ॥
sarvaṁ khalvidaṁ brahma tajjalān iti śānta upāsīta
atha khalu kratumayaḥ puruṣo yathākratur asmiṁlloke puruṣo bhavati tathetaḥ pretya bhavati sa kratuṁ kurvīta
यह सब निश्चय ही ब्रह्म है। उसी से यह उत्पन्न होता है, उसी में लीन होता है और उसी में जीता एवं श्वास लेता है। अतः शान्त चित्त से उसी की उपासना करनी चाहिए। मनुष्य संकल्पमय है — इस लोक में जैसी उसकी श्रद्धा (संकल्प) होती है, मृत्यु के पश्चात् वह वैसा ही बन जाता है। इसलिए मनुष्य को (ब्रह्म-उपासना का) दृढ़ संकल्प करना चाहिए।
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