सर्वस्य बुद्धिरूपेण — नारायणि नमोऽस्तु ते (देवी के विश्वरूप) PDF
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सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते । स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
sarvasya buddhirūpeṇa janasya hṛdi saṃsthite svargāpavargade devi nārāyaṇi namo'stu te
हे समस्त जनों के हृदय में बुद्धि रूप से स्थित! हे स्वर्ग और मोक्ष देने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे कला, काष्ठा आदि (काल के) रूप से (सब) परिणाम प्रदान करने वाली! हे विश्व के संहार में समर्थ शक्ति! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्ति-स्वरूपा सनातनी! हे गुणों की आश्रय और गुणमयी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है। हे शरणागत, दीन और आर्त जनों की रक्षा में तत्पर! हे सबकी पीड़ा हरने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
कलाकाष्ठादिरूपेण परिणामप्रदायिनि । विश्वस्योपरतौ शक्ते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
kalākāṣṭhādirūpeṇa pariṇāmapradāyini viśvasyoparatau śakte nārāyaṇi namo'stu te
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि । गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
sṛṣṭisthitivināśānāṃ śaktibhūte sanātani guṇāśraye guṇamaye nārāyaṇi namo'stu te
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
śaraṇāgatadīnārtaparitrāṇaparāyaṇe sarvasyārtihare devi nārāyaṇi namo'stu te