सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलम् (विष्णु ध्यानम्) PDF
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलम् (विष्णु ध्यानम्) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् । सहार वक्षःस्थलशोभिकौस्तुभं नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥
Sa-Shankha-Chakram Sa-Kirita-Kundalam Sa-Pita-Vastram Sarasiruhekṣhanam | Sa-Hara Vakṣhah-Sthala-Shobhi-Kaustubham Namami Vishnum Shirasa Chatur-Bhujam ||
मैं चतुर्भुज भगवान विष्णु को शिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — जो शंख और चक्र धारण किए हुए हैं, जो मुकुट और कुण्डल पहने हुए हैं, जो पीताम्बर धारण किए हुए हैं, जिनके नेत्र कमल के समान हैं, और जिनके वक्षस्थल पर हार तथा देदीप्यमान कौस्तुभ मणि सुशोभित है।