अथातो भक्तिजिज्ञासा PDF
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अथातो भक्तिजिज्ञासा ॥ १ ॥ सा परानुरक्तिरीश्वरे ॥ २ ॥
athāto bhakti-jijñāsā (1) sā parānuraktir īśvare (2)
अब, इसलिए, (आरम्भ होती है) भक्ति की जिज्ञासा। (१) वह (भक्ति) ईश्वर के प्रति परम अनुरक्ति (प्रेममयी आसक्ति) है। (२)