शनि स्तोत्रम् PDF
शनि स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
ॐ शनैश्चरः स्वधाकारी छायाभूः सूर्यनन्दनः । मार्तण्डजो यमः सौरिः पङ्गूश्च ग्रहनायकः ॥ १॥
oṃ śanaiścaraḥ svadhākārī chāyābhūḥ sūryanandanaḥ | mārtaṇḍajo yamaḥ sauriḥ paṅgūśca grahanāyakaḥ || 1||
ॐ। शनैश्चर (मन्दगति), स्वधाकारी, छाया के पुत्र, सूर्य के आनन्द; मार्तण्ड से उत्पन्न, यम (न्यायकर्ता), सौरि, पङ्गु, एवं ग्रहों के नायक;
ब्रह्मण्योऽक्रूरधर्मज्ञो नीलवर्णोऽञ्जनद्युतिः । द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ॥ २॥
brahmaṇyo'krūradharmajño nīlavarṇo'ñjanadyutiḥ | dvādaśaitāni nāmāni trisandhyaṃ yaḥ paṭhennaraḥ || 2||
ब्रह्मण्य, अक्रूर, धर्मज्ञ, नीलवर्ण, अञ्जन के समान कान्ति वाले — जो मनुष्य इन बारह नामों को त्रिसन्ध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में पढ़ता है,
तस्य पीडां नचैवाहं करिष्यामि न संशयः । गोचरे जन्मलग्ने च वापस्वन्तर्दशासु च ॥ ३॥
tasya pīḍāṃ nacaivāhaṃ kariṣyāmi na saṃśayaḥ | gocare janmalagne ca vāpasvantardaśāsu ca || 3||
उसे मैं (शनि) कोई पीड़ा नहीं दूँगा — इसमें संशय नहीं — चाहे गोचर में हो, जन्मलग्न पर हो, अथवा मेरी अन्तर्दशाओं में हो।
॥ इति शनैश्चरस्तोत्रम् ॥
|| iti śanaiścarastotram ||
इस प्रकार शनैश्चर स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ।