षण्मुख स्तोत्रम् (षडाननं कुङ्कुमरक्तवर्णम्) PDF
षण्मुख स्तोत्रम् (षडाननं कुङ्कुमरक्तवर्णम्) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
षडाननं कुङ्कुमरक्तवर्णं महामतिं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरसैन्यनाथं गुहं सदाहं शरणं प्रपद्ये ॥
ṣaḍānanaṃ kuṅkumaraktavarṇaṃ mahāmatiṃ divyamayūravāhanam | rudrasya sūnuṃ surasainyanāthaṃ guhaṃ sadāhaṃ śaraṇaṃ prapadye ||
मैं सदा गुह की शरण लेता हूँ — षण्मुख (छह मुख वाले) भगवान, कुङ्कुम के समान गहरे लाल वर्ण वाले, महान बुद्धि वाले, दिव्य मयूर पर सवार, रुद्र (शिव) के पुत्र और देवसेना के अधिपति।
ज्ञानशक्तिधर स्कन्द वल्लीकल्याणसुन्दर । देवसेनामनःकान्त कार्तिकेय नमोऽस्तु ते ॥
jñānaśaktidhara skanda vallīkalyāṇasundara | devasenāmanaḥkānta kārtikeya namo'stu te ||
हे ज्ञानशक्ति (वेल) के धारक, हे स्कन्द, हे वल्ली के सुन्दर वर, हे देवसेना के मनप्रिय, हे कार्तिकेय — आपको नमस्कार हो।
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः ।
oṃ subrahmaṇyāya namaḥ |
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः।