शिवनामावल्यष्टकम् PDF
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हे चन्द्रचूड मदनान्तक शूलपाणे स्थाणो गिरीश गिरिजेश महेश शम्भो। भूतेश भीतभयसूदन मामनाथं संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥१॥
He Chandrachuda Madana-Antaka Shula-Pane Sthano Girisha Girija-Isha Mahesha Shambho Bhutesha Bhita-Bhaya-Sudana Mam-Anatham Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (1)
हे चन्द्रचूड, कामदेव के अन्तक, शूलधारी; हे स्थाणु, गिरीश, गिरिजेश, महेश, शम्भो; हे भूतेश, भयभीतों का भय दूर करने वाले — मुझ अनाथ की संसार के दुःखरूपी सघन वन से रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
हे पार्वतीहृदयवल्लभ चन्द्रमौले भूताधिप प्रमथनाथ गिरीशचाप। हे वामदेव भव रुद्र पिनाकपाणे संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥२॥
He Parvati-Hridaya-Vallabha Chandra-Maule Bhuta-Adhipa Pramatha-Natha Girisha-Chapa He Vamadeva Bhava Rudra Pinaka-Pane Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (2)
हे पार्वती के हृदयवल्लभ, चन्द्रमौलि; हे भूताधिप, प्रमथनाथ, गिरीशचाप (मेरुधनुर्धारी); हे वामदेव, भव, रुद्र, पिनाकपाणि — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
हे नीलकण्ठ वृषभध्वज पञ्चवक्त्र लोकेश शेषवलय प्रमथेश शर्व। हे धूर्जटे पशुपते गिरिजापते मां संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥३॥
He Nilakantha Vrishabha-Dhvaja Pancha-Vaktra Lokesha Shesha-Valaya Pramath-Esha Sharva He Dhurjate Pashupate Girija-Pate Mam Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (3)
हे नीलकण्ठ, वृषभध्वज, पञ्चमुख; हे लोकेश, शेषवलय (नागकंकण), प्रमथेश, शर्व; हे धूर्जटि, पशुपति, गिरिजापति — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
हे विश्वनाथ शिव शङ्कर देवदेव गङ्गाधर प्रमथनायक नन्दिकेश। बाणेश्वरान्धकरिपो हर लोकनाथ संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥४॥
He Vishvanatha Shiva Shankara Deva-Deva Gangadhara Pramatha-Nayaka Nandikesha Baneshvar-Andhaka-Ripo Hara Loka-Natha Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (4)
हे विश्वनाथ, शिव, शंकर, देवदेव; हे गंगाधर, प्रमथनायक, नन्दिकेश; हे बाणेश्वर, अन्धकारि, हर, लोकनाथ — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
वाराणसीपुरपते मणिकर्णिकेश वीरेश दक्षमखकाल विभो गणेश। सर्वज्ञ सर्वहृदयैकनिवास नाथ संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥५॥
Varanasi-Pura-Pate Manikarnik-Esha Viresha Daksha-Makha-Kala Vibho Gan-Esha Sarvajna Sarva-Hridayaika-Nivasa Natha Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (5)
हे वाराणसीपुरपति, मणिकर्णिकेश; हे वीरेश, दक्षयज्ञविनाशक, विभो गणेश; हे सर्वज्ञ, सबके हृदय में एकमात्र निवास करने वाले नाथ — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
श्रीमन्महेश्वर कृपामय हे दयालो हे व्योमकेश शितिकण्ठ गणाधिनाथ। भस्माङ्गराग नृकपालकलापमाल संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥६॥
Shriman-Maheshvara Kripamaya He Dayalo He Vyoma-Kesha Shiti-Kantha Gana-Adhi-Natha Bhasma-Anga-Raga Nri-Kapala-Kalapa-Mala Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (6)
हे श्रीमन्महेश्वर, कृपामय, दयालु; हे व्योमकेश, शितिकण्ठ, गणाधिनाथ; हे भस्म ही जिनका अंगराग है, नरकपालों की माला धारण करने वाले — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
कैलासशैलविनिवास विशालभाल भाललोचन सुरेश सुरारिनाथ। हे अन्धकासुरनिसूदन मेदिनीश संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष॥७॥
Kailasa-Shaila-Vinivasa Vishala-Bhala Bhala-Lochana Suresha Sura-Ari-Natha He Andhaka-Asura-Nisudana Medinisha Samsara-Duhkha-Gahanaj-Jagadisha Raksha (7)
हे कैलासशैल निवासी, विशालभाल; हे भाललोचन, सुरेश, सुरारिनाथ; हे अन्धकासुरनिसूदन, मेदिनीश — संसार के दुःखरूपी सघन वन से मेरी रक्षा कीजिए, हे जगदीश!
गौरीविलासभवनाय महेश्वराय पञ्चाननाय शरणागतकल्पकाय। शर्वाय सर्वजगतामधिपाय तस्मै दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥८॥
Gauri-Vilasa-Bhavanaya Maheshvaraya Panchananaya Sharana-Agata-Kalpakaya Sharvaya Sarva-Jagatam-Adhipaya Tasmai Daridrya-Duhkha-Dahanaya Namah Shivaya (8)
जो गौरी के विलास के भवनस्वरूप हैं, महेश्वर हैं, पञ्चानन हैं, शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष हैं, शर्व हैं, समस्त जगत् के अधिपति हैं — उस दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार है।