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सिन्दूरारुण विग्रहां (ललिता सहस्रनाम ध्यान) — Complete Lyrics

सिन्दूरारुण विग्रहां (ललिता सहस्रनाम ध्यान)

Sanskrit text with English transliteration and translation

सिन्दूरारुण विग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलि स्फुरत् तारा नायक शेखरां स्मितमुखीमापीन वक्षोरुहाम् पाणिभ्यामलिपूर्ण रत्न चषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीं सौम्यां रत्न घटस्थ रक्तचरणां ध्यायेत् परामम्बिकाम्
Sindūrāruṇa vigrahāṁ trinayanāṁ māṇikyamauli sphurat Tārā nāyaka śekharāṁ smitamukhīmāpīna vakṣoruhām | Pāṇibhyāmalipūrṇa ratna caṣakaṁ raktotpalaṁ bibhratīṁ Saumyāṁ ratna ghaṭastha raktacaraṇāṁ dhyāyet parāmambikām ||
उस परम अम्बिका का ध्यान करना चाहिए जिनका विग्रह सिन्दूर के समान अरुण है, जो त्रिनयना हैं, जिनका माणिक्य-मुकुट देदीप्यमान है, जो ताराओं के स्वामी चन्द्र को शिरोभूषण रूप में धारण करती हैं; मुस्कुराते मुखवाली, पीन वक्षवाली देवी, जो अपने दोनों हाथों में मधु से भरा रत्नचषक और रक्तकमल धारण करती हैं, सौम्य रूपा, जिनके रक्तवर्ण चरण रत्नघट पर स्थित हैं।

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