श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी (ललिता सहस्रनाम आरम्भ) PDF
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ॐ श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्सिंहासनेश्वरी । चिदग्निकुण्डसंभूता देवकार्यसमुद्यता ॥
Oṁ Śrīmātā Śrīmahārājñī Śrīmatsiṁhāsaneśvarī | Cidagnikuṇḍasaṁbhūtā Devakāryasamudyatā ||
ॐ। वह श्रीमाता हैं, श्रीमहाराज्ञी हैं, दिव्य सिंहासन पर विराजमान ईश्वरी हैं। वे चिदग्नि-कुण्ड से प्रकट हुईं और देवताओं के कार्य (भण्डासुर-वध) हेतु उद्यत हुईं।
उद्यद्भानुसहस्राभा चतुर्बाहुसमन्विता । रागस्वरूपपाशाढ्या क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला ॥
Udyadbhānusahasrābhā Caturbāhusamanvitā | Rāgasvarūpapāśāḍhyā Krodhākārāṅkuśojjvalā ||
वे सहस्र उदीयमान सूर्यों के समान प्रभावाली और चार भुजाओं से युक्त हैं। अपने हाथों में वे राग-रूप पाश और क्रोध-रूप अंकुश धारण करती हैं।
मनोरूपेक्षुकोदण्डा पञ्चतन्मात्रसायका । निजारुणप्रभापूरमज्जद्ब्रह्माण्डमण्डला ॥
Manorūpekṣukodaṇḍā Pañcatanmātrasāyakā | Nijāruṇaprabhāpūramajjadbrahmāṇḍamaṇḍalā ||
उनका धनुष मन रूपी इक्षु-दण्ड है और पाँच बाण पाँच तन्मात्राएँ हैं; उनकी अपनी अरुण प्रभा के प्रवाह में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड-मण्डल निमग्न रहता है।