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श्रीराघवं दशरथात्मजम् PDF

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श्रीराघवं दशरथात्मजमप्रमेयं सीतापतिं रघुकुलान्वयरत्नदीपम् । आजानुबाहुम् अरविन्ददलायताक्षं रामं निशाचरविनाशकरं नमामि ॥

Shri-Raghavam Dasharathatmajam-Aprameyam Sita-Patim Raghu-Kulanvaya-Ratna-Dipam | A-Janu-Bahum Aravinda-Dalayatakṣham Ramam Nishachara-Vinasha-Karam Namami ||

मैं श्रीराम को प्रणाम करता हूँ — जो राघव हैं, दशरथ के पुत्र हैं, अप्रमेय (अमाप) हैं; जो सीता के स्वामी हैं; रघुकुल की वंश-परम्परा के रत्न-दीप (तेजस्वी मणि) हैं; जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं और नेत्र कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल हैं; तथा जो निशाचरों (राक्षसों) का नाश करने वाले हैं।