Mantra.Tips

सुखस्य मूलं धर्मः — Complete Lyrics

सुखस्य मूलं धर्मः

Sanskrit text with English transliteration and translation

सुखस्य मूलं धर्मः। धर्मस्य मूलम् अर्थः। अर्थस्य मूलं राज्यम्। राज्यस्य मूलम् इन्द्रियजयः। इन्द्रियजयस्य मूलं विनयः। विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा॥
sukhasya mūlaṁ dharmaḥ। dharmasya mūlam arthaḥ। arthasya mūlaṁ rājyam। rājyasya mūlam indriya-jayaḥ। indriya-jayasya mūlaṁ vinayaḥ। vinayasya mūlaṁ vṛddhopasevā॥
सुख का मूल धर्म है। धर्म का मूल अर्थ (न्यायपूर्वक अर्जित धन) है। अर्थ का मूल सुव्यवस्थित राज्य है। राज्य का मूल इन्द्रियों पर विजय (आत्मसंयम) है। इन्द्रियजय का मूल विनय (नम्रता) है। और विनय का मूल वृद्धजनों एवं ज्ञानियों की सेवा है। यह श्लोक सुख को चरण-दर-चरण ज्ञानी-वृद्धजनों की विनम्र सेवा तक पहुँचाता है।

Want to understand every word?

Read Word-by-Word Meaning →