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सुमुखश्चैकदन्तश्च PDF

सुमुखश्चैकदन्तश्च की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः॥

Sumukhaś caikadantaś ca kapilo gajakarṇakaḥ। Lambodaraś ca vikaṭo vighnanāśo gaṇādhipaḥ॥

सुमुख (सुन्दर मुख वाले), एकदन्त (एक दाँत वाले), कपिल (कपिल वर्ण के), गजकर्ण (हाथी जैसे कानों वाले), लम्बोदर (बड़े उदर वाले), विकट (विशालकाय), विघ्ननाश (विघ्नों के नाशक), गणाधिप (गणों के स्वामी), धूम्रकेतु (धूम्र-ध्वज वाले), गणाध्यक्ष (गणों के अध्यक्ष), भालचन्द्र (मस्तक पर चन्द्र धारण करने वाले) और गजानन (गजमुख) — गणेश के इन बारह नामों का जो विद्यारम्भ, विवाह, प्रवेश एवं प्रस्थान, संग्राम तथा किसी भी सङ्कट के समय पाठ करता है या सुनता भी है — उसके लिए कोई विघ्न उत्पन्न नहीं होता।

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः। द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥

Dhūmraketur gaṇādhyakṣo bhālacandro gajānanaḥ। Dvādaśaitāni nāmāni yaḥ paṭhec chṛṇuyād api॥

विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा। संग्रामे सङ्कटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥

Vidyārambhe vivāhe ca praveśe nirgame tathā। Saṅgrāme saṅkaṭe caiva vighnas tasya na jāyate॥