सूर्य अर्घ्य मन्त्र PDF
सूर्य अर्घ्य मन्त्र की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
Ehi Surya Sahasramsho Tejorashe Jagatpate. Anukampaya Mam Bhaktya Grihanarghyam Divakara.
हे सूर्यदेव, सहस्ररश्मि, तेज के पुंज, जगत् के स्वामी — पधारिए! मेरी भक्ति देखकर मुझ पर कृपा कीजिए, हे दिवाकर, और इस अर्घ्य (जल) को स्वीकार कीजिए। सूर्य को नमस्कार। आदित्य को नमस्कार। भास्कर को नमस्कार। यह अर्घ्य आपको अर्पित है, यह मेरा नहीं है। (साधक दोनों हाथों में जल लेकर सूर्य की ओर धारा रूप में छोड़ते हुए इन शब्दों का उच्चारण करता है।)
ॐ सूर्याय नमः। ॐ आदित्याय नमः। ॐ भास्कराय नमः। इदमर्घ्यं दत्तं न मम॥
Om Suryaya Namah. Om Adityaya Namah. Om Bhaskaraya Namah. Idam-Arghyam Dattam Na Mama.