तैलाद्रक्षेज्जलाद्रक्षेत् PDF
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तैलाद्रक्षेज्जलाद्रक्षेद्रक्षेच्छिथिलबन्धनात्। मूर्खहस्ते न दातव्यमेवं वदति पुस्तकम्॥
tailād rakṣej jalād rakṣed rakṣec chithila-bandhanāt। mūrkha-haste na dātavyam evaṁ vadati pustakam॥
मुझे तेल से बचाओ, जल से बचाओ, ढीले बन्धन से बचाओ, और किसी मूर्ख के हाथ में मत दो — इस प्रकार पुस्तक कहती है। इस मनोहर श्लोक में पुस्तक स्वयं अपनी चार रक्षाओं को कहती है, जिनमें अन्तिम सबसे महत्त्वपूर्ण है: विद्या कभी अयोग्य व्यक्ति को नहीं सौंपनी चाहिए।