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तपोभिः क्षीणपापानाम् PDF

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तपोभिः क्षीणपापानां शान्तानां वीतरागिणाम् । मुमुक्षूणामपेक्ष्योऽयमात्मबोधो विधीयते ॥

tapobhiḥ kṣīṇa-pāpānāṃ śāntānāṃ vīta-rāgiṇām mumukṣūṇām apekṣyo'yam ātma-bodho vidhīyate

यह आत्मबोध (आत्मा का ज्ञान) उन साधकों के लिए प्रतिपादित किया जाता है जिनके पाप तपस्या से क्षीण हो चुके हैं, जो शान्त और रागरहित हैं, तथा जो मोक्ष की कामना करते हैं।