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तप्तकाञ्चनगौराङ्गी (राधा प्रणाम) PDF

तप्तकाञ्चनगौराङ्गी (राधा प्रणाम) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

तप्तकाञ्चनगौराङ्गी राधे वृन्दावनेश्वरी । वृषभानुसुते देवि प्रणमामि हरिप्रिये ॥

Tapta-kanchana-gaurangi radhe vrindavaneshvari Vrishabhanu-sute devi pranamami hari-priye

हे राधा, जिनका वर्ण तपाए हुए स्वर्ण के समान देदीप्यमान है, हे वृन्दावन की अधीश्वरी! हे वृषभानु की पुत्री, हे देवी, हे श्रीहरि (कृष्ण) की परम प्रिया — मैं आपको विनम्र प्रणाम करता हूँ।