Mantra.Tips

त्रैलोक्यमेतदखिलम् PDF

त्रैलोक्यमेतदखिलम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

त्रैलोक्यमेतदखिलं रिपुनाशनेन त्रातं त्वया समरमूर्धनि तेऽपि हत्वा । नीता दिवं रिपुगणा भयमप्यपास्तम् अस्माकमुन्मदसुरारिभवं नमस्ते ॥

trailokyametadakhilaṃ ripunāśanena trātaṃ tvayā samaramūrdhani te'pi hatvā nītā divaṃ ripugaṇā bhayamapyapāstam asmākamunmadasurāribhavaṃ namaste

इस सम्पूर्ण त्रैलोक्य की रक्षा आपने शत्रुओं का नाश करके की है; और युद्ध के मुहाने पर उन्हें मारकर शत्रु-समूहों को स्वर्ग पहुँचाया है, तथा उन्मत्त देवशत्रुओं से उत्पन्न हमारे भय को भी दूर किया है — आपको नमस्कार!