तुलसी नमस्तुभ्यम् PDF
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तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे। नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये॥
Tulasi Shri-Sakhi Shubhe Papa-Harini Punya-De. Namaste Narada-Nute Narayana-Manah-Priye.
हे तुलसी, लक्ष्मी की प्रिय सखी, शुभे, पापों को हरने वाली और पुण्य देने वाली — आपको नमस्कार, हे नारद-वन्दिता, नारायण के मन को प्रिय! जिसके मूल में समस्त तीर्थ, मध्य में समस्त देवता, और अग्रभाग में समस्त वेद विराजते हैं — हे तुलसी, मैं आपको प्रणाम करता हूँ। हे तुलसी, आप अमृत से उत्पन्न हैं और सदा केशव को प्रिय हैं; मैं केशव की पूजा हेतु आपके पत्र चुनता हूँ — हे शोभने, वरदायिनी होकर मुझे वर प्रदान कीजिए।
यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः। यदग्रे सर्ववेदाश्च तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥
Yan-Mule Sarva-Tirthani Yan-Madhye Sarva-Devatah. Yad-Agre Sarva-Vedash-Cha Tulasi Tvam Namamyaham.
तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया। केशवार्थं चिनोमि त्वां वरदा भव शोभने॥
Tulasy-Amrita-Janmasi Sada Tvam Keshava-Priya. Keshavartham Chinomi Tvam Varada Bhava Shobhane.