वंशीविभूषितकरान्नवनीरदाभात् PDF
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वंशीविभूषितकरान्नवनीरदाभात् पीताम्बरादरुणबिम्बफलाधरोष्ठात्। पूर्णेन्दुसुन्दरमुखादरविन्दनेत्रात् कृष्णात्परं किमपि तत्त्वमहं न जाने॥
Vamshi-vibhushita-karan nava-nirada-bhat, Pitambarad aruna-bimba-phaladharoshthat, Purnendu-sundara-mukhad aravinda-netrat, Krishnat param kimapi tattvam aham na jane.
मैं कृष्ण से परे किसी भी तत्त्व को नहीं जानता — जिनका हाथ वंशी से सुशोभित है, जिनकी कान्ति नवीन मेघ-सी है, जो पीताम्बर धारण किए हैं, जिनका अधरोष्ठ पके बिम्बफल-सा अरुण है, जिनका मुख पूर्ण चन्द्रमा-सा सुन्दर है, और जिनके नेत्र कमल के समान हैं।