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वास्तु शान्ति मन्त्र (वास्तोष्पते) PDF

वास्तु शान्ति मन्त्र (वास्तोष्पते) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥

Vāstoṣpate prati jānīhy asmān svāveśo anamīvo bhavā naḥ। Yat tvemahe prati tan no juṣasva śaṁ no bhava dvipade śaṁ catuṣpade॥

हे वास्तोष्पते (गृह के अधिष्ठाता देव), हमें अपना मानकर स्वीकार करो; हमारे लिए सुखद-निवास्य और रोगरहित बनो। हम जो भी तुमसे माँगें, उसे कृपापूर्वक प्रदान करो; हमारे द्विपदों (मनुष्यों) तथा चतुष्पदों (पशुओं) के लिए कल्याणकारी बनो। हे वास्तोष्पते, हमारे उन्नायक एवं रक्षक बनो; गौ, अश्व आदि से हमारे घर की समृद्धि बढ़ाओ, हे तेजस्वी देव। हम जरारहित होकर तुम्हारी मैत्री में स्थित रहें; जैसे पिता अपने पुत्रों को, वैसे ही तुम हमें प्रेमपूर्वक अपनाओ।

वास्तोष्पते प्रतरणो न एधि गयस्फानो गोभिरश्वेभिरिन्दो। अजरासस्ते सख्ये स्याम पितेव पुत्रान्प्रति नो जुषस्व॥

Vāstoṣpate prataraṇo na edhi gayasphāno gobhir aśvebhir indo। Ajarāsas te sakhye syāma piteva putrān prati no juṣasva॥