वेदवेद्ये परे पुंसि PDF
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वेदवेद्ये परे पुंसि जाते दशरथात्मजे । वेदः प्राचेतसादासीत् साक्षाद्रामायणात्मना ॥
Vedavedye Pare Pumsi Jate Dasharathatmaje | Vedah Prachetasad Asit Sakshad Ramayanatmana ||
जब वेदों के द्वारा जानने योग्य परम पुरुष (परमात्मा) दशरथ के पुत्र (राम) के रूप में अवतरित हुए, तब वही वेद महर्षि वाल्मीकि (प्राचेतस) के मुख से साक्षात् रामायण के रूप में प्रकट हुआ। अर्थात् जैसे वेदातीत प्रभु राम बनकर अवतरित हुए, वैसे ही वेद वाल्मीकि के द्वारा रामायण रूप में प्रकट होकर उनकी महिमा का गान करने लगा।