श्री वेङ्कटेश करावलम्ब स्तोत्रम् PDF
श्री वेङ्कटेश करावलम्ब स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
श्रीशेषशैलसुनिकेतन दिव्यमूर्ते नारायणाच्युत हरे नलिनायताक्ष। लीलाकटाक्षपरिरक्षितसर्वलोक श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Shri-shesha-shaila-suniketana divya-murte Narayanachyuta hare nalinayataksha Lila-kataksha-parirakshita-sarva-loka Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे श्रीशेषाचल (तिरुमला) पर्वत पर सुन्दर निवास करने वाले दिव्यमूर्ते, हे नारायण, अच्युत, हरि, कमलनयन, अपने लीलामय कटाक्ष से समस्त लोकों की रक्षा करने वाले — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
ब्रह्मादिवन्दितपदाम्बुज शङ्खपाणे श्रीमत्सुदर्शनसुशोभितदिव्यहस्त। कारुण्यसागर शरण्य सुपुण्यमूर्ते श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Brahmadi-vandita-padambuja shankha-pane Shrimat-sudarshana-sushobhita-divya-hasta Karunya-sagara sharanya su-punya-murte Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे ब्रह्मा आदि देवों से वन्दित चरणकमल वाले, अपने दिव्य हाथों में शङ्ख और शोभायमान सुदर्शन धारण करने वाले, हे करुणा के सागर, शरणागत के आश्रय, परम पुण्यमूर्ते — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
वेदान्तवेद्य भवसागरकर्णधार श्रीपद्मनाभ कमलार्चितपादपद्म। लोकैकपावन परात्पर पापहारिन् श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Vedanta-vedya bhava-sagara-karnadhara Shri-padmanabha kamalarchita-pada-padma Lokaika-pavana paratpara papa-harin Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे वेदान्त से जानने योग्य, भवसागर के कर्णधार, हे पद्मनाभ जिनके चरणकमल कमला (लक्ष्मी) से अर्चित हैं, हे एकमात्र लोकपावन, परात्पर, पापहारी — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
लक्ष्मीपते निगमलक्ष्य निजस्वरूप कामादिदोषपरिहारक बोधदायिन्। दैत्यादिमर्दन जनार्दन वासुदेव श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Lakshmipate nigama-lakshya nija-svarupa Kamadi-dosha-pariharaka bodha-dayin Daityadi-mardana janardana vasudeva Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे लक्ष्मीपते, निगमों के लक्ष्य, स्वस्वरूप, काम आदि दोषों को दूर करने वाले एवं ज्ञान देने वाले, दैत्यों का मर्दन करने वाले, हे जनार्दन, वासुदेव — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
तापत्रयं हर विभो रभसान्मुरारे संरक्ष मां करुणया सरसीरुहाक्ष। मच्छिष्यमित्यनुदिनं परिरक्ष विष्णो श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Tapa-trayam hara vibho rabhasan-murare Samraksha mam karunaya sarasiruhaksha Mach-chhishyam-ity-anudinam pariraksha vishno Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे विभो मुरारे! शीघ्र ही तीनों तापों को हर लीजिए; हे कमलनयन! करुणा से मेरी रक्षा कीजिए; हे विष्णो! मुझे प्रतिदिन अपना शिष्य जानकर बचाइए — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
श्रीजातरूपनवरत्नलसत्किरीट कस्तूरिकातिलकशोभिललाटदेश। राकेन्दुबिम्बवदनाम्बुज वारिजाक्ष श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Shri-jata-rupa-nava-ratna-lasat-kirita Kasturika-tilaka-shobhi-lalata-desha Rakendu-bimba-vadanambuja varijaksha Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे उत्तम स्वर्ण एवं नवरत्नों से दीप्त मुकुट धारण करने वाले, कस्तूरी के तिलक से सुशोभित ललाट वाले, पूर्ण चन्द्र-बिम्ब समान मुखकमल वाले, कमलनयन — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
वन्दारुलोकवरदानवचोविलास रत्नाढ्यहारपरिशोभित कम्बुकण्ठ। केयूररत्नसुविभासिदिगन्तराल श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Vandaru-loka-varadana-vacho-vilasa Ratnadhya-hara-parishobhita kambu-kantha Keyura-ratna-suvibhasi-digantarala Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे भक्तजनों को वरदान देने वाली वाणी से विलास करने वाले, रत्नजटित हारों से सुशोभित शङ्ख-समान कण्ठ वाले, केयूर के रत्नों से दिशाओं को प्रकाशित करने वाले — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
दिव्याङ्गदाङ्कितभुजद्वय मङ्गलात्मन् केयूरभूषण सुशोभित दीर्घबाहो। नागेन्द्रकङ्कणकरद्वयकामदायिन् श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Divyangadankita-bhuja-dvaya mangalatman Keyura-bhushana sushobhita dirgha-baho Nagendra-kankana-kara-dvaya-kama-dayin Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे मङ्गलस्वरूप, दिव्य अङ्गदों से अङ्कित दोनों भुजाओं वाले, केयूर-भूषणों से सुशोभित दीर्घबाहु, नागेन्द्र-कङ्कणयुक्त दोनों हाथों से कामनाएँ पूर्ण करने वाले — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
स्वामिन् जगद्धरण वारिधिमध्यमग्न मामुद्धरय कृपया करुणापयोधे। लक्ष्मींश्च देहि मम धर्मसमृद्धिहेतुं श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Svamin jagad-dharana varidhi-madhya-magna Mam-uddhara kripaya karuna-payodhe Lakshmimshcha dehi mama dharma-samriddhi-hetum Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे स्वामिन्, जगत् के धारक! मैं संसार-सागर के मध्य में डूब रहा हूँ; हे करुणा के समुद्र! कृपा से मेरा उद्धार कीजिए; और धर्म की समृद्धि के लिए मुझे लक्ष्मी प्रदान कीजिए — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
दिव्याङ्गरागपरिचर्चितकोमलाङ्ग पीताम्बरावृततनो तरुणार्कभास। सत्याञ्जनाभपरिधान सुपत्तबन्ध श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Divyanga-raga-paricharchita-komalanga Pitambaravrita-tano tarunarka-bhasa Satyanjanabha-paridhana su-patta-bandha Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे दिव्य अङ्गराग से चर्चित कोमल अङ्गों वाले, पीताम्बर से आवृत शरीर वाले, उदित सूर्य के समान कान्तिमान्, सुन्दर वस्त्रबन्ध वाले — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
रत्नाढ्यदामसुनिबद्धकटिप्रदेश माणिक्यदर्पणसुसन्निभजानुदेश। जङ्घाद्वयेन परिमोहितसर्वलोक श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Ratnadhya-dama-sunibaddha-kati-pradesha Manikya-darpana-susannibha-janu-desha Janghadvayena parimohita-sarva-loka Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे रत्नमय करधनी से सुबद्ध कटिप्रदेश वाले, माणिक्य-दर्पण समान जानु वाले, अपनी दोनों जङ्घाओं से समस्त लोकों को मोहित करने वाले — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
लोकैकपावनसरित्परिशोभिताङ्घ्रे त्वत्पाददर्शन दिने च ममाघमीश। हार्दं तमश्च सकलं लयमाप भूमन् श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Lokaika-pavana-sarit-parishobhitanghre Tvat-pada-darshana dine cha mamagham-isha Hardam tamashcha sakalam layam-apa bhuman Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे एकमात्र लोकपावन सरिता से सुशोभित चरणों वाले! हे ईश! जिस दिन मैंने आपके चरणों का दर्शन किया, हे भूमन्! मेरा समस्त पाप एवं हृदय का अन्धकार विलीन हो गया — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
कामादिवैरिनिवहोच्युत मे प्रयातः दारिद्र्यमप्यपगतं सकलं दयालो। दीनं च मां समवलोक्य दयार्द्रदृष्ट्या श्रीवेङ्कटेश मम देहि करावलम्बम्॥
Kamadi-vairi-nivahochyuta me prayatah Daridryam-apy-apagatam sakalam dayalo Dinam cha mam samavalokya dayardra-drishtya Shri-venkatesha mama dehi karavalambam
हे अच्युत! काम आदि शत्रुओं का समूह मुझसे दूर हो गया, हे दयालो! मेरी समस्त दरिद्रता भी जाती रही; मुझ दीन को दया से आर्द्र दृष्टि से देखकर — हे श्री वेङ्कटेश! मुझे अपने हाथ का सहारा दीजिए।
श्रीवेङ्कटेशपदपङ्कजषट्पदेन श्रीमन्नृसिंहयतिना रचितं जगत्याम्। एतत्पठन्ति मनुजाः पुरुषोत्तमस्य ते प्राप्नुवन्ति परमां पदवीं मुरारेः॥
Shri-venkatesha-pada-pankaja-shatpadena Shriman-nrisimha-yatina rachitam jagatyam Etat-pathanti manujah purushottamasya Te prapnuvanti paramam padavim murareh
यह स्तोत्र श्री वेङ्कटेश के चरणकमलों के भ्रमर-समान श्रीमन्नृसिंह यति द्वारा इस जगत् में रचा गया। जो मनुष्य इसका पाठ करते हैं, वे पुरुषोत्तम मुरारि के परम पद को प्राप्त करते हैं।