Mantra.Tips

विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः — Complete Lyrics

विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः
vidyāḥ samastāstava devi bhedāḥ striyaḥ samastāḥ sakalā jagatsu tvayaikayā pūritamambayaitat kā te stutiḥ stavyaparāparoktiḥ
हे देवी! समस्त विद्याएँ आपके ही भेद हैं; जगत् की समस्त स्त्रियाँ आपके ही रूप हैं। हे अम्बे! आप अकेली से ही यह विश्व परिपूर्ण है। स्तुति से परे, परम वाणी-स्वरूपा आपकी क्या स्तुति की जाए?
Verse 2
सर्वभूता यदा देवी भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः
sarvabhūtā yadā devī bhuktimuktipradāyinī tvaṃ stutā stutaye kā vā bhavantu paramoktayaḥ
जब आप — समस्त भूत-स्वरूपा, भोग और मोक्ष देने वाली देवी — की स्तुति की जाए, तब स्तुति के लिए कौन-सी श्रेष्ठ उक्तियाँ पर्याप्त हो सकती हैं?

Want to understand every word?

Read Word-by-Word Meaning →