विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः PDF
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विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु । त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः ॥
vidyāḥ samastāstava devi bhedāḥ striyaḥ samastāḥ sakalā jagatsu tvayaikayā pūritamambayaitat kā te stutiḥ stavyaparāparoktiḥ
हे देवी! समस्त विद्याएँ आपके ही भेद हैं; जगत् की समस्त स्त्रियाँ आपके ही रूप हैं। हे अम्बे! आप अकेली से ही यह विश्व परिपूर्ण है। स्तुति से परे, परम वाणी-स्वरूपा आपकी क्या स्तुति की जाए?
सर्वभूता यदा देवी भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी । त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः ॥
sarvabhūtā yadā devī bhuktimuktipradāyinī tvaṃ stutā stutaye kā vā bhavantu paramoktayaḥ
जब आप — समस्त भूत-स्वरूपा, भोग और मोक्ष देने वाली देवी — की स्तुति की जाए, तब स्तुति के लिए कौन-सी श्रेष्ठ उक्तियाँ पर्याप्त हो सकती हैं?