विद्यासि सा भगवती परमा PDF
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या मुक्तिहेतुरविचिन्त्यमहाव्रता त्वं अभ्यस्यसे सुनियतेन्द्रियतत्त्वसारैः । मोक्षार्थिभिर्मुनिभिरस्तसमस्तदोषै- र्विद्यासि सा भगवती परमा हि देवि ॥
yā muktiheturavicintyamahāvratā tvaṃ abhyasyase suniyatendriyatattvasāraiḥ mokṣārthibhirmunibhirastasamastadoṣai- rvidyāsi sā bhagavatī paramā hi devi
जो मुक्ति की हेतु और अचिन्त्य महाव्रत स्वरूपा हैं, उन आपका अभ्यास (ध्यान) इन्द्रियों को वश में किए, तत्त्व के सार को जानने वाले, समस्त दोषों से रहित मोक्षार्थी मुनि करते हैं; हे देवी! वही परम विद्या आप भगवती हैं।