विघ्नराज गणपति स्तोत्रम् (हेरम्ब गणपति स्तोत्रम्) PDF
विघ्नराज गणपति स्तोत्रम् (हेरम्ब गणपति स्तोत्रम्) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
श्रीगणेशाय नमः । ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने । दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥१॥
śrī gaṇeśāya namaḥ । oṁ namo vighna-rājāya sarva-saukhya-pradāyine । duṣṭāriṣṭa-vināśāya parāya paramātmane ॥1॥
श्रीगणेश को नमस्कार।
लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् । अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ॥२॥
lambodaraṁ mahā-vīryaṁ nāga-yajñopaśobhitam । ardha-chandra-dharaṁ devaṁ vighna-vyūha-vināśanam ॥2॥
ॐ, विघ्नराज को नमस्कार — जो समस्त सुख के दाता, दुष्टों एवं अरिष्टों के नाशक, पर एवं परमात्मस्वरूप हैं।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हेरम्बाय नमो नमः । सर्वसिद्धिप्रदोऽसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ॥३॥
oṁ hrāṁ hrīṁ hrūṁ hraiṁ hrauṁ hraḥ herambāya namo namaḥ । sarva-siddhi-prado'si tvaṁ siddhi-buddhi-prado bhava ॥3॥
लम्बोदर, महावीर्य, नाग-यज्ञोपवीत से सुशोभित, अर्धचन्द्रधारी देव, विघ्नों के समूह का नाश करने वाले।
चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः । सिन्दूरारुणवस्त्रैश्च पूजितो वरदायकः ॥४॥
chintitārtha-pradas tvaṁ hi satataṁ modaka-priyaḥ । sindūrāruṇa-vastraiś cha pūjito vara-dāyakaḥ ॥4॥
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः — हेरम्ब को बार-बार नमस्कार। आप समस्त सिद्धियों के दाता हैं; मुझे सिद्धि एवं बुद्धि प्रदान करने वाले हों।
इदं गणपतिस्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः । तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मुञ्चति ॥५॥
idaṁ gaṇapati-stotraṁ yaḥ paṭhed bhakti-mān naraḥ । tasya dehaṁ cha gehaṁ cha svayaṁ lakṣmīr na muñchati ॥5॥
आप निश्चय ही चिन्तित अर्थ (मनोवांछित) के दाता हैं, सदा मोदकप्रिय; सिन्दूर एवं अरुण वस्त्रों से पूजित, वरदायक।
इति श्रीगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
iti śrī-gaṇapati-stotraṁ sampūrṇam ॥
जो भक्तिमान् मनुष्य इस गणपति स्तोत्र का पाठ करता है, उसके देह एवं गृह को स्वयं लक्ष्मी कभी नहीं छोड़तीं।