Mantra.Tips

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वम् (विश्व की रक्षिका देवी) PDF

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वम् (विश्व की रक्षिका देवी) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र । दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ॥

rakṣāṃsi yatrograviṣāśca nāgā yatrārayo dasyubalāni yatra dāvānalo yatra tathābdhimadhye tatra sthitā tvaṃ paripāsi viśvam

जहाँ राक्षस और उग्र विष वाले नाग हैं, जहाँ शत्रु और दस्युओं के बल हैं, जहाँ दावानल है, और समुद्र के बीच में भी — वहाँ स्थित रहकर आप विश्व की रक्षा करती हैं। हे विश्वेश्वरी! आप विश्व की रक्षा करती हैं; विश्वात्मिका होकर आप ही यहाँ विश्व को धारण करती हैं; आप विश्व के स्वामियों द्वारा भी वन्दनीय हैं; और जो भक्ति से आपके आगे नम्र होते हैं, वे विश्व के आश्रय बन जाते हैं। हे देवी! प्रसन्न होइए; जैसे अभी असुर-वध से आपने हमारी रक्षा की, वैसे ही सदा हमें शत्रु-भय से बचाइए। और समस्त जगत् के पापों तथा उत्पातों से उत्पन्न महान् उपसर्गों को शीघ्र शान्त कीजिए। हे विश्व की पीड़ा हरने वाली देवी! हम प्रणत जनों पर प्रसन्न होइए; हे त्रैलोक्य-निवासियों द्वारा वन्दनीय! लोकों को वर देने वाली बनिए!

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीह विश्वम् । विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥

viśveśvari tvaṃ paripāsi viśvaṃ viśvātmikā dhārayasīha viśvam viśveśavandyā bhavatī bhavanti viśvāśrayā ye tvayi bhaktinamrāḥ

देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीते- र्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः । पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान् ॥

devi prasīda paripālaya no'ribhīte- rnityaṃ yathāsuravadhādadhunaiva sadyaḥ pāpāni sarvajagatāṃ praśamaṃ nayāśu utpātapākajanitāṃśca mahopasargān

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि । त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव ॥

praṇatānāṃ prasīda tvaṃ devi viśvārtihāriṇi trailokyavāsināmīḍye lokānāṃ varadā bhava