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वृक्षांश्छित्त्वा पशून् हत्वा PDF

वृक्षांश्छित्त्वा पशून् हत्वा की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

वृक्षांश्छित्त्वा पशून् हत्वा कृत्वा रुधिरकर्दमम्। यद्येवं गम्यते स्वर्गं नरकः केन गम्यते॥

vṛkṣāṁś chittvā paśūn hatvā kṛtvā rudhira-kardamam। yady evaṁ gamyate svargaṁ narakaḥ kena gamyate॥

यदि वृक्षों को काटकर, पशुओं का वध करके, और रक्त का कीचड़ बनाकर स्वर्ग प्राप्त किया जाता है, तो फिर नरक किस कर्म से प्राप्त होता है? यह तीखा श्लोक उन कर्मकाण्डों और कृत्यों की क्रूरता पर प्रश्न करता है जो जीवन का नाश करते हैं, और करुणा एवं अहिंसा को धर्म का सच्चा मार्ग बताता है।