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यदि देहं पृथक् कृत्य (अष्टावक्र गीता १.३) PDF

यदि देहं पृथक् कृत्य (अष्टावक्र गीता १.३) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

यदि देहं पृथक् कृत्य चिति विश्राम्य तिष्ठसि। अधुनैव सुखी शान्तो बन्धमुक्तो भविष्यसि॥

yadi dehaṃ pṛthak kṛtya citi viśrāmya tiṣṭhasi | adhunaiva sukhī śānto bandha-mukto bhaviṣyasi ||

यदि तुम देह को (अपने से) पृथक् करके चित् (शुद्ध चैतन्य) में विश्राम करते हुए स्थित हो जाओ, तो अभी इसी क्षण सुखी, शान्त और बन्धन से मुक्त हो जाओगे।