श्री यमुना जी की आरती PDF
श्री यमुना जी की आरती की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
ॐ जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तीनों लोक विख्याता ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Om Jai Yamuna Mata, Maiya Jai Yamuna Mata Sura-nara-munijana sevata, teenon loka vikhyaata Om Jai Yamuna Mata
हे यमुना माता, आपकी जय हो! देवता, मनुष्य और मुनिजन आपकी सेवा करते हैं और आप तीनों लोकों में विख्यात हैं।
पिता आपके सूरज, छाया महतारी । यम-यमुना सहोदर, कृष्णप्रिया प्यारी ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Pita aapke sooraj, chhaaya mahataari Yama-Yamuna sahodara, Krishnapriya pyaari Om Jai Yamuna Mata
आपके पिता सूर्य देव और माता छाया हैं; यमराज आपके सहोदर भाई हैं और आप श्रीकृष्ण की प्रिया हैं।
श्याम-वरण जल शोभित, मन्द-मन्द बहती । कल-कल ध्वनि करती हुई, भक्तन सुख देती ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Shyama-varana jala shobhita, manda-manda bahati Kala-kala dhvani karati hui, bhaktana sukha deti Om Jai Yamuna Mata
आपका श्यामवर्ण जल मन्द-मन्द बहता है, मधुर कल-कल ध्वनि करता हुआ भक्तों को सुख देता है।
कालिन्दी कलि-नाशिनि, कष्ट निवारणी । पाप-ताप सब हरती, भव-बन्धन हारिणी ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Kalindi kali-naashini, kashta nivaarani Paapa-taapa saba harati, bhava-bandhana haarini Om Jai Yamuna Mata
हे कालिन्दी, कलियुग के पापों का नाश करने वाली और कष्ट दूर करने वाली, आप समस्त पाप-ताप हर लेती हैं और भव-बन्धन से मुक्त करती हैं।
तीरथराज प्रयागे, गंगा-संग मिलती । त्रिवेणी सङ्गम बनकर, सबको तारती ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Teeratha-raaja Prayaage, Ganga-sanga milati Triveni sangama banakara, sabako taarati Om Jai Yamuna Mata
तीर्थराज प्रयाग में आप माँ गंगा से मिलती हैं और त्रिवेणी संगम बनकर सबको भवसागर से तार देती हैं।
वृन्दावन की शोभा, ब्रज-रज से न्यारी । कृष्ण-कन्हैया खेले, तेरे तट प्यारी ॥ ॐ जय यमुना माता ॥
Vrindavana ki shobha, braja-raja se nyaari Krishna-Kanhaiya khele, tere tata pyaari Om Jai Yamuna Mata
आप वृन्दावन की शोभा हैं, ब्रज की रज से भी अधिक प्यारी, क्योंकि कृष्ण-कन्हैया ने आपके तट पर लीलाएँ कीं, हे प्यारी माता।
जो जन यमुना-आरती, प्रेम-सहित गावे । यम का त्रास न होवे, मनवांछित पावे ॥ ॐ जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता ॥
Jo jana Yamuna-aarti, prema-sahita gaave Yama ka traasa na hove, manavaanchhita paave Om Jai Yamuna Mata, Maiya Jai Yamuna Mata
जो भी प्रेमपूर्वक यमुना जी की यह आरती गाता है, वह यम के भय से मुक्त होकर मनवांछित फल पाता है।