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मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणाम् PDF

मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणाम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम् ॥

Maitri-karuna-mudita-upekshanam sukha-duhkha-punya-apunya-vishayanam bhavanatash chitta-prasadanam

सुखी जनों के प्रति मैत्री, दुःखी जनों के प्रति करुणा, पुण्यात्माओं के प्रति मुदिता (प्रसन्नता) और पापियों के प्रति उपेक्षा (समता) की भावना करने से चित्त प्रसन्न एवं निर्मल हो जाता है।