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आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः PDF

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आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः। देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवेदिवे॥

Ā no bhadrāḥ kratavo yantu viśvato 'dabdhāso aparītāsa udbhidaḥ | Devā no yathā sadam id vṛdhe asann aprāyuvo rakṣitāro dive-dive ||

हमारे पास चारों ओर से कल्याणकारी विचार आएँ — ऐसे विचार जो अकुण्ठित, अबाधित और सदा नवीन हों। देवगण सदा हमारी उन्नति और समृद्धि के लिए हमारे साथ रहें, जो अथक होकर प्रतिदिन हमारी रक्षा करते हैं। हमारे मन में केवल वही प्रवेश करे जो शुभ, सत्य और उन्नायक है, जिससे दिव्य शक्तियाँ सदा हमारे कल्याण को धारण और संवर्धित करती रहें।