अच्युतानन्तगोविन्द — Word-by-Word Meaning
अच्युतानन्तगोविन्द
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
अच्युत
acyuta
अच्युत — अविनाशी, जो अपने स्वरूप से कभी च्युत नहीं होते (विष्णु)
अनन्त
ananta
अनन्त — अन्तरहित, असीम
गोविन्द
govinda
गोविन्द — गौओं तथा इन्द्रियों के रक्षक, श्रीकृष्ण
नाम
nāma
नाम — (पवित्र) नाम
उच्चारण
uccāraṇa
उच्चारण — उच्चारण, उच्चार
भेषजात्
bheṣajāt
औषधि से (की)
नश्यन्ति
naśyanti
नष्ट हो जाते हैं, विनष्ट हो जाते हैं
सकलाः
sakalāḥ
समस्त, सब प्रकार के
रोगाः
rogāḥ
रोग, व्याधियाँ
सत्यं सत्यं
satyaṃ satyaṃ
सत्य है, सत्य है (यह सत्य है, यह सत्य है)
वदामि अहम्
vadāmi aham
मैं कहता हूँ, मैं घोषणा करता हूँ
Complete Translation
अच्युत, अनन्त और गोविन्द — इन नामों के उच्चारण रूपी औषधि से समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं; यह सत्य है, सत्य है, ऐसा मैं कहता हूँ।
Origin & History
Source: Traditional Vaishnava nama-mahima verse (recited in the Vishnu-smarana / Sahasranama tradition)
Author: Traditional
Period: Puranic / classical
वैष्णव परम्परा में पवित्र नाम की महिमा (नाम-महिमा) का गुणगान करने वाले श्लोकों में, यह छोटा श्लोक आरोग्य के प्रयोजन हेतु सर्वाधिक प्रसिद्ध है। यह पुराणों में बार-बार दोहराए गए उस विश्वास को सार रूप में प्रकट करता है कि भगवान के नाम सामान्य ध्वनि नहीं, अपितु स्वयं भगवान का सामर्थ्य धारण करते हैं। नामों को 'भेषज' (औषधि) कहकर और दो बार सत्य की शपथ लेकर, यह श्लोक पीड़ितों को शुद्ध श्रद्धा की औषधि प्रदान करता है। इसे प्रायः रोगशय्या के पास और स्वास्थ्य-लाभ के समय जपा जाता है।
Frequently Asked Questions
अच्युतानन्तगोविन्द मंत्र किसलिए है?▼
यह एक परम्परागत आरोग्य-प्रार्थना है। श्लोक कहता है कि भगवान के नाम अच्युत, अनन्त और गोविन्द का उच्चारण स्वयं एक औषधि है जो समस्त रोगों का नाश करती है, इसलिए इसे स्वास्थ्य और रोग-निवृत्ति हेतु जपा जाता है।
इन तीन नामों का अर्थ क्या है?▼
अच्युत का अर्थ है 'अविनाशी, जो कभी च्युत नहीं होते'; अनन्त का अर्थ है 'अन्तरहित, असीम'; गोविन्द का अर्थ है 'गौओं तथा इन्द्रियों के रक्षक' — ये सभी भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण के सुप्रसिद्ध नाम हैं।
क्या इसका जप औषधि का स्थान ले लेता है?▼
परम्परा से इसे सामान्य उपचार के साथ जपा जाता है, उसके स्थान पर नहीं। यह एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है जो रोग के समय श्रद्धा, मन की शान्ति और भगवान की कृपा प्रदान करती है तथा स्वास्थ्य-लाभ में सहायक होती है।
इस श्लोक का जप कौन कर सकता है?▼
इसे कोई भी जप सकता है — रोगी, परिवारजन अथवा शुभचिंतक। इसके लिए किसी औपचारिक दीक्षा की आवश्यकता नहीं, और यह इसी कारण मूल्यवान है कि छोटा और भक्तिपूर्वक दोहराने में सरल है।
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