अगस्त्यं कुम्भकर्णं च — भोजनोत्तर (पाचन) मन्त्र — Word-by-Word Meaning
अगस्त्यं कुम्भकर्णं च — भोजनोत्तर (पाचन) मन्त्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
अगस्त्यं
Agastyam
ऋषि अगस्त्य (जिन्होंने एक बार समस्त समुद्र पी लिया था)
कुम्भकर्णं
Kumbhakarnam
कुम्भकर्ण (रावण का भाई, अपार भूख और पाचन वाला)
च
cha
और
शनिं
Shanim
शनि (शनिदेव)
बडबानलम्
Badabanalam
बडबानल — समुद्र के जल को भस्म करने वाली समुद्राग्नि
आहारपरिणामार्थं
ahara-parinama-artham
भोजन के सम्यक् पाचन / अंगीकरण के लिए
स्मरामि
smarami
मैं स्मरण करता हूँ / मन में लाता हूँ
च
cha
और (भी)
वृकोदरम्
Vrikodaram
वृकोदर (भीम), 'भेड़िये के समान उदर वाले', असाधारण पाचन-शक्ति वाले
Complete Translation
अपने भोजन के सम्यक् पाचन के लिए मैं अगस्त्य, कुम्भकर्ण, शनि, बडबानल (समुद्र की अग्नि) और वृकोदर (भीम) का स्मरण करता हूँ — जो सभी अपार पाचन-शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।
Origin & History
Source: Traditional smarana (remembrance) shloka recited after meals
Author: Traditional
Period: Classical
यह प्रिय श्लोक भोजन और स्वास्थ्य से जुड़ी दैनिक भक्ति-संस्कृति का अंग है। भोजन कर लेने के पश्चात् भक्त उन पाँच विभूतियों का स्मरण करता है जो असाधारण भोजन एवं पाचन-शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं — अगस्त्य, जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने एक ही घूँट में समुद्र निगल लिया; अपार भूख वाले कुम्भकर्ण और भीम; शनि; तथा समुद्राग्नि बडबानल जो निरन्तर समुद्र के जल को भस्म करती है। 'भोजन के पाचन के लिए' इनका स्मरण करके यह श्लोक सहज तथा भक्तिपूर्ण ढंग से प्रबल अन्तर्-अग्नि, उत्तम स्वास्थ्य और भोजन के बाद सुखद विश्राम का आवाहन करता है।
Frequently Asked Questions
अगस्त्यं कुम्भकर्णं श्लोक का उद्देश्य क्या है?▼
यह भोजन के पश्चात् (और रात्रि में सोने से पूर्व) पढ़ी जाने वाली एक संक्षिप्त प्रार्थना है, जो खाए गए अन्न के सम्यक् पाचन की याचना करती है — 'आहारपरिणामार्थम्', अर्थात् भोजन के अंगीकरण के लिए।
अगस्त्य, कुम्भकर्ण, शनि, बडबानल और भीम का स्मरण क्यों किया जाता है?▼
ये पाँचों परम्परा में अपनी अपार भोजन एवं पाचन-क्षमता के लिए विख्यात हैं: ऋषि अगस्त्य ने समस्त समुद्र पी लिया, कुम्भकर्ण और भीम (वृकोदर) की भूख पौराणिक थी, शनि एक शक्तिशाली ग्रह हैं, और बडबानल वह समुद्राग्नि है जो समुद्र के जल को निगलती है। इनका स्मरण समान रूप से प्रबल पाचन-शक्ति की प्रार्थना है।
इसे पढ़ने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?▼
भोजन के तुरन्त पश्चात्, और सबसे अधिक परम्परागत रूप से रात्रि के भोजन के बाद सोने से पूर्व, ताकि रात्रि का विश्राम सुखद हो और भोजन भली-भाँति पच जाए।
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