Mantra.Tips

अगस्त्यं कुम्भकर्णं च — भोजनोत्तर (पाचन) मन्त्र PDF

अगस्त्यं कुम्भकर्णं च — भोजनोत्तर (पाचन) मन्त्र की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च बडबानलम् । आहारपरिणामार्थं स्मरामि च वृकोदरम् ॥

Agastyam Kumbhakarnam cha Shanim cha Badabanalam Ahara-parinamartham smarami cha Vrikodaram

अपने भोजन के सम्यक् पाचन के लिए मैं अगस्त्य, कुम्भकर्ण, शनि, बडबानल (समुद्र की अग्नि) और वृकोदर (भीम) का स्मरण करता हूँ — जो सभी अपार पाचन-शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।