अघमर्षण सूक्तम् Meaning — Line by Line
अघमर्षण सूक्तम्
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
Every verse of अघमर्षण सूक्तम् with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.
Ṛtaṃ ca satyaṃ cābhīddhāttapaso'dhyajāyata |
ऋतं च सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत । ततो रात्र्यजायत ततः समुद्रो अर्णवः ॥१॥
Ṛtaṃ ca satyaṃ cābhīddhāttapaso'dhyajāyata | tato rātryajāyata tataḥ samudro arṇavaḥ ||1||
Meaningतेजोमय तप (सृष्टि की उष्णता एवं तपस्या) से ऋत (ब्रह्माण्डीय व्यवस्था) और सत्य उत्पन्न हुए; उससे रात्रि उत्पन्न हुई, और उससे तरंगित, गहन समुद्र (ब्रह्माण्डीय जल) उत्पन्न हुआ।
Samudrādarṇavādadhi saṃvatsaro ajāyata |
समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद्विश्वस्य मिषतो वशी ॥२॥
Samudrādarṇavādadhi saṃvatsaro ajāyata | ahorātrāṇi vidadhadviśvasya miṣato vaśī ||2||
Meaningउस तरंगित समुद्र से संवत्सर (वर्ष — काल का मान) उत्पन्न हुआ, जो दिन-रात का विधान करने वाला तथा समस्त चेतन (पलक झपकाने वाले) प्राणियों का स्वामी है।
Sūryācandramasau dhātā yathāpūrvamakalpayat |
सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं चान्तरिक्षमथो स्वः ॥३॥
Sūryācandramasau dhātā yathāpūrvamakalpayat | divaṃ ca pṛthivīṃ cāntarikṣamatho svaḥ ||3||
Meaningधाता (सृष्टिकर्ता) ने पूर्व कल्पों की भाँति सूर्य और चन्द्रमा की रचना की, तथा द्युलोक, पृथ्वी, अन्तरिक्ष और स्वर्लोक (प्रकाशमय लोक) की भी।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Rigveda (Mandala 10, Sukta 190)
Author: Rishi Aghamarshana Madhucchandasa
Period: Vedic period (c. 1500-1000 BCE)
अघमर्षण सूक्तम् ऋग्वेद के लगभग अन्त में स्थित है और परम्परा से ऋषि अघमर्षण, मधुच्छन्दा के पुत्र, को आरोपित है। केवल तीन मन्त्रों का होते हुए भी यह वेद के महान सृष्टि-सूक्तों में से एक है, जो वर्णन करता है कि किस प्रकार ब्रह्माण्डीय व्यवस्था और सत्य, रात्रि, ब्रह्माण्डीय समुद्र, काल, ज्योतिर्मण्डल और लोक क्रमशः आदि-तप से प्रकट हुए। अपनी विषय-वस्तु तथा अपने ऋषि के नाम से इसे सर्वोच्च 'पापमर्षक' मन्त्र की भूमिका प्राप्त हुई: सन्ध्यावन्दन में इसके चारों ओर एक सम्पूर्ण क्रिया — अघमर्षण — रची गई है, जिसमें उपासक जल हाथ में लेकर तथा ब्रह्माण्डीय नियम का चिन्तन करते हुए अशुद्धि का त्याग करता है। इस प्रकार यह गहन ब्रह्माण्डविद्या को दैनिक व्यावहारिक शुद्धि से जोड़ता है।
Frequently Asked Questions
अघमर्षण सूक्तम् क्या है?▼
इसे 'अघमर्षण' क्यों कहा जाता है?▼
यह सूक्त वास्तव में क्या वर्णन करता है?▼
इसका पाठ कब और कैसे किया जाता है?▼
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