अघोर मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का दक्षिण मुख) — Word-by-Word Meaning
अघोर मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का दक्षिण मुख)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
अघोरेभ्यः
Aghorebhyah
रुद्र के अघोर अर्थात् भयरहित, सौम्य और मंगलमय रूपों को
अथ
Atha
और भी, तब
घोरेभ्यः
Ghorebhyah
उग्र, भयंकर रूपों को
घोरघोरतरेभ्यः
Ghoraghoratarebhyah
जो भयंकर से भी अधिक भयंकर हैं (सर्वाधिक भयप्रद रूपों को)
च
Cha
और
सर्वेभ्यः
Sarvebhyah
सभी (रूपों) को
सर्वशर्वेभ्यः
Sarvasharvebhyah
समस्त शर्वों को — सर्वत्र शिव-रुद्र के सभी रूपों को
नमस्ते अस्तु
Namaste Astu
आपको नमस्कार हो / आपको प्रणाम हो
रुद्ररूपेभ्यः
Rudrarupebhyah
रुद्र (शिव) के सभी रूपों को
Complete Translation
अघोर (सौम्य) रूपों को, और घोर (उग्र) रूपों को नमस्कार; जो घोर से भी अधिक घोर हैं उन्हें भी; उन सब को, सर्वत्र शिव-रुद्र के समस्त रूपों को — रुद्र के इन सभी रूपों को नमस्कार हो।
Origin & History
Source: Yajurveda — Taittiriya Aranyaka; Panchabrahma Upanishad; Shaiva Agamas
Author: Vedic (apaurusheya — revealed)
Period: Vedic
अघोर मंत्र उन पाँच पंचब्रह्म मंत्रों में से एक है जो सदाशिव के पाँच मुखों का आवाहन करते हैं। यह दक्षिण मुख से संबंधित है, जो संहार (विलय एवं पुनः-अवशोषण) का स्थान है और भैरव जैसे शिव के उग्र, रक्षक रूपों का उद्गम है। यजुर्वेद परम्परा में प्राप्त यह मंत्र रुद्राभिषेक एवं आगमिक उपासना में रुद्र को उनके सभी रूपों में एकमात्र परम सत्ता के रूप में सम्मानित करने हेतु पाठ किया जाता है।
Frequently Asked Questions
'अघोर' का क्या अर्थ है?▼
'अघोर' का अर्थ है 'जो भयंकर/भयप्रद नहीं है'। यह मंत्र उस प्रभु को नमन करता है जो एक साथ अघोर (सौम्य), घोर (उग्र) और घोर-घोरतर (सर्वाधिक भयप्रद) हैं, यह सिखाते हुए कि ये सब एक ही रुद्र के रूप हैं। यह तीसरा पंचब्रह्म मंत्र है, जो संहार से जुड़े दक्षिण मुख का शासक है।
क्या अघोर मंत्र का जप खतरनाक है?▼
नहीं। यद्यपि यह रुद्र के उग्र रूपों का नाम लेता है, यह मंत्र एक नमस्कार (नमस्कार) है जो वास्तव में शांत करता है और रक्षा करता है। पारम्परिक शिव उपासना के अंग के रूप में भक्ति से जपने पर यह निर्भयता और कृपा प्रदान करता है। सभी वैदिक मंत्रों की भाँति, शुद्ध उच्चारण और श्रद्धामय भाव का आग्रह किया जाता है।
इसका भैरव से क्या संबंध है?▼
शिव का अघोर/दक्षिण मुख भैरव सहित उग्र रक्षक रूपों का स्रोत है। अघोर उपासना और भैरव पूजा इस मंत्र के द्वारा शिव के भय-नाशक रूप का आवाहन करती हैं, जो बाधाओं को दूर करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।
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