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अघोर मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का दक्षिण मुख) PDF

अघोर मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का दक्षिण मुख) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यश्च। सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः॥

Aghorebhyo'tha Ghorebhyo Ghoraghoratarebhyashcha Sarvebhyah Sarvasharvebhyo Namaste Astu Rudrarupebhyah

अघोर (सौम्य) रूपों को, और घोर (उग्र) रूपों को नमस्कार; जो घोर से भी अधिक घोर हैं उन्हें भी; उन सब को, सर्वत्र शिव-रुद्र के समस्त रूपों को — रुद्र के इन सभी रूपों को नमस्कार हो।