Mantra.Tips

अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं (ललिता ध्यान) — Word-by-Word Meaning

अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं (ललिता ध्यान)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

अरुणाम्
arunam
अरुण वर्ण की, उषा के रंग की
करुणा
karuna
करुणा, दया
तरङ्गित
tarangita
तरंगित, लहराती हुई
अक्षीम्
akshim
(नेत्र) — जिनके नेत्र करुणा से तरंगित हैं
धृत
dhrita
धारण करने वाली
पाश
pasha
पाश
अङ्कुश
ankusha
अंकुश
पुष्पबाण
pushpa-bana
पुष्पबाण (फूलों के बाण)
चापाम्
chapam
धनुष
अणिमादिभिः
animadibhih
अणिमा आदि सिद्धियों से (आठ योग-सिद्धियाँ)
आवृताम्
avritam
घिरी हुई, आवृत
मयूखैः
mayukhaih
प्रकाश की किरणों से
अहम् इति एव
aham iti eva
अपने ही आत्मस्वरूप के रूप में ('मैं ही हूँ')
विभावये
vibhavaye
मैं ध्यान करता हूँ / चिन्तन करता हूँ
भवानीम्
bhavanim
भवानी, दिव्य माता, भव (शिव) की पत्नी

Complete Translation

मैं भवानी का ध्यान करता हूँ — जो अरुण वर्ण की हैं, जिनके नेत्र करुणा की तरंगों से तरंगित हैं, जो पाश, अंकुश, पुष्पबाण और धनुष धारण करती हैं, जो अणिमा आदि सिद्धियों की किरणों से आवृत हैं — और मैं उन्हें अपने ही स्वरूप के रूप में, 'मैं ही वह हूँ' इस भाव से ध्यान करता हूँ।

Origin & History

Source: Dhyana verse of the Lalita Sahasranama, Brahmanda Purana (Lalitopakhyana)

Author: Traditional (Lalitopakhyana of the Brahmanda Purana)

Period: Ancient (Puranic)

ललिता सहस्रनाम से पूर्व आने वाले ध्यान-श्लोकों में यह 'अहम्' ध्यान विशेष स्थान रखता है। जहाँ अन्य ध्यान देवी के रूप का बाह्य पूजन हेतु वर्णन करते हैं, वहीं यह श्लोक उपासक को अन्तर्मुख ले जाता है, जिसकी परिणति 'मैं ही वह हूँ' की अनुभूति में होती है — जो ब्रह्माण्ड पुराण के ललितोपाख्यान में प्रकट श्रीविद्या मार्ग का सर्वोच्च लक्ष्य है।

Frequently Asked Questions

इस ध्यान-श्लोक को विशेष क्या बनाता है?
इसके अन्तिम शब्द 'अहमित्येव विभावये भवानीम्' — 'मैं भवानी का ध्यान अपने ही स्वरूप के रूप में करता हूँ' — श्रीविद्या के अद्वैत हृदय को व्यक्त करते हैं, जहाँ उपासक देवी को पृथक मानकर पूजने के बजाय उनके साथ अपनी अभिन्नता का अनुभव करता है।
देवी कौन-से चार आयुध धारण करती हैं?
वे पाश (फंदा), अंकुश (अंकुश), पुष्पबाण (फूलों के बाण) और चाप (धनुष) धारण करती हैं। ये उन शक्तियों के प्रतीक हैं जिनके द्वारा देवी समस्त प्राणियों के मन और इन्द्रियों का संचालन करती हैं।
भवानी कौन हैं?
भवानी दिव्य माता का एक नाम है, जो भव (शिव) की पत्नी हैं। यहाँ वे ललिता त्रिपुर सुन्दरी के समान हैं, जो श्रीविद्या परम्परा की परम देवी हैं।
श्लोक में उल्लिखित 'अणिमादि' सिद्धियाँ कौन-सी हैं?
ये आठ सिद्धियाँ या मायावी शक्तियाँ हैं — अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व — जिन्हें देवी को घेरती हुई प्रकाश की किरणों के रूप में चित्रित किया गया है।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →